टाइफाइड के कारण, लक्षण, और इलाज – Typhoid Fever in Hindi

टाइफाइड बुखार क्या है? – What is Typhoid Fever in Hindi?

दोस्तो, दूषित (Contaminated) पानी पीने और भोजन खाने से आप एक गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं| इसे टाइफाइड बुखार (typhoid fever in Hindi) के नाम से जाना जाता है|

इस रोग का कारण साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) नामक बैक्टीरिया है| यह बीमारी आपके शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है और शीघ्र इलाज के अभाव में यह खतरनाक भी हो सकती है|

टाइफाइड बुखार एक गैस्ट्रोइंटेस्टिनल संक्रमण (gastrointestinal infection) है, जो साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है|

यह बैक्टीरिया गंदे पानी या भोजन के द्वारा आपके मुंह के जरिए आपकी आंतों में प्रवेश करके वहां लगभग एक से तीन सप्ताह तक रहता है| उसके बाद आंतों की दीवार (intestinal wall) के जरिए आपके रक्त (bloodstream) में प्रवेश कर जाता है| रक्त प्रवाह से यह बैक्टीरिया अन्य ऊतकों (Tissues) और अंगों (Organs) में फैलकर कोशिकाओं के अंदर पहुँच जाता है| टाइफाइड के लिए आज बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध है| लेकिन इलाज नहीं कराने पर यह आपके लिए घातक साबित हो सकता है|

टाइफाइड (typhoid in hindi) होने पर तेज बुखार, दस्त, तथा उल्टी मुख्य लक्षण हो सकते हैं| दूषित पानी या भोजन के कारण इस संक्रमण के होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है|

विकसित देशों में टाइफाइड बुखार (Typhoid Fever in Hindi) दुर्लभ है, लेकिन अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, मध्य अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों और पश्चिमी प्रशांत के देशों में यह बीमारी एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है|

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के अनुसार दुनिया भर में प्रतिवर्ष टाइफाइड बुखार के लगभग 11 से 20 मिलियन मामले सामने आते हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रति वर्ष लगभग 1,28,000 से 1,61,000 मौतें होती हैं|

इन देशों में सुरक्षित पानी और पर्याप्त स्वच्छता तक पहुंच की कमी से टाइफाइड का खतरा अधिक होता है| बच्चों सहित गरीब समुदायों को इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है|

टाइफाइड बुखार के लक्षण क्या हैं? – What are the Symptoms of Typhoid Fever in Hindi?

दोस्तो, साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया के संपर्क में आने के लगभग 1-3 सप्ताह के बाद व्यक्ति में टाइफाइड बुखार के लक्षण (typhoid symptoms in hindi) दिखाई देते हैं| गंभीरता के आधार पर इस बुखार की अवधि 3 से 4 सप्ताह तक भी हो सकती है| इसका सामान्य इन्क्यूबेशन समय (normal incubation period) 7 से 14 दिन है|

आमतौर पर इसके लक्षण धीरे धीरे विकसित होते हैं|

टाइफाइड के लक्षण typhoid symptoms in hindi
टाइफाइड के लक्षण (typhoid ke lakshan)

टाइफाइड बुखार के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं (Main Symptoms of Typhoid Fever in Hindi):

  • तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • दस्त (डायरिया) या कब्ज
  • भूख न लगना
  • जी मिचलाना
  • सूखी खांसी
  • थकान और कमजोरी महसूस होना
  • पेट में दर्द
  • लिवर और स्प्लीन का बढ़ जाना
  • सीने पर लाल रंग के निशान
  • ठंड लगना
  • मांसपेशियों में दर्द
  • वजन घटना

अगर समय पर इलाज किया जाए तो टाइफाइड के लक्षण (typhoid ke lakshan) 3 से 5 दिन में ठीक होने लगते हैं| परन्तु इलाज न होने पर यह बुखार आमतौर पर कुछ हफ्तों के दौरान खराब हो सकता है और कई जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं|

इसके गंभीर मामलों में आंत्र का छिद्रित होना (Bowel perforation), पेरिटोनिटिस (peritonitis) जैसी समस्याएं हो सकती हैं|

एक पैराटाइफाइड नामक अन्य संक्रमण जो  साल्मोनेला एंटरिका (salmonella enterica) के कारण होता है| इसमें टाइफाइड के समान ही लक्षण होते हैं, लेकिन इसके घातक होने की संभावना बहुत कम होती है|

टाइफाइड बुखार के कारण क्या हैं? – What are the Causes of Typhoid Fever in Hindi?

दोस्तो, टाइफाइड बुखार का कारण साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया है|

यह बुखार तब होता है, जब कोई व्यक्ति ऐसे खाद्य पदार्थ या पानी का सेवन करता है, जिसमें साल्मोनेला टाइफी (बैक्टीरिया) मौजूद हो|

यदि टाइफाइड का रोगी मल त्याग करने के बाद अपने हाथों को कीटाणुनाशक साबुन से अच्छे से नहीं धोता और उन्हीं हाथों से खाने-पीने की अथवा अन्य वस्तुओं को स्पर्श करता है, तथा और कोई दूसरा स्वस्थ व्यक्ति उन्हीं वस्तुओं को छूने के बाद साबुन से बिना हाथ धोए कोई खाद्य पदार्थ ग्रहण करता है तो उसके भी टाइफाइड के बैक्टीरिया से सक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है|

इसके अतिरिक्त टाइफाइड रोगी के मल से मक्खियों के द्वारा उसके चारों-तरफ होने वाली पीने के पानी की आपूर्ति भी दूषित हो सकती है| और किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा उस दूषित (संक्रमित) पानी को पीने के बाद उसको भी टाइफाइड बुखार हो सकता है|

टाइफाइड बुखार का निदान कैसे किया जाता है? – How is the Diagnosis of Typhoid Fever done in Hindi?

आपके लक्षणों को देखते हुए यदि आपके डॉक्टर को लगेगा कि आपको टाइफाइड बुखार हो सकता है, तो वह कुछ टेस्ट करवाने के लिए सलाह दे सकता है|

शुरुआती स्टेज में साल्मोनेला टाइफी (बैक्टीरिया) आपके शरीर में मौजूद है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए ब्लड सैंपल की जांच की जाती है| इसके अतिरिक्त आपके स्टूल (मल) का टेस्ट करके भी टाइफाइड के बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है|

रक्त परीक्षण में विडाल टेस्ट (widal test) भी टाइफाइड के निदान का एक प्रचलित तरीका है| लेकि‌न कई बार इस बुखार के ठीक होने के बाद भी काफी देर तक विडाल टेस्ट पॉजिटिव आता रहता है| इसके लिए मल का कल्चर या रक्त का कल्चर परीक्षण कराना बेहतर विकल्प है|

टाइफाइड बुखार की पहचान (या निदान) के लिए किये जाने वाले अन्य परीक्षणों में एंजाइम से संबंधित इम्यूनो सोरबेंट एस्से (एलिसा) और फ्लोरोसेंट एंटीबॉडी परीक्षण भी शामिल हैं|

कभी-कभी इस बुखार का संक्रमण अधिक होने पर अगर मरीज को ज्यादा पेट दर्द या उल्टी हो रही हो तो सोनोग्राफी भी करनी पड़ती है|

टाइफाइड बुखार से बचाव के क्या उपाय हैं? – How to Prevent Typhoid Fever in Hindi?

टाइफायड बुखार से बचाव के दो मौलिक उपाय हैं

  • टाइफायड की वैक्सीन लेना
  • संक्रमित खाने और पीने की चीजों से बचना|

टाइफायड बुखार की वैक्सीन – Typhoid Fever Vaccine in Hindi

दोस्तो, टाइफाइड बुखार से बचाव के लिए सर्वोत्तम उपाय इसकी वैक्सीन लेना ही है| फिर भी कुछ समय के बाद इसकी वैक्सीन का प्रभाव जाता रहता है| इसलिए यदि आपने पहले इसकी वैक्सीन का टीका लगवाया है, तो आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेकर इसकी बूस्टर डोस (booster dose) का टीका लगवा लेना चाहिए|

टाइफाइड बुखार से बचाव
टाइफाइड बुखार की वैक्सीन

टाइफाइड बुखार की वैक्सीन दो रूपों में ली जा सकती है:

डब्ल्यूएचओ (WHO) टाइफाइड बुखार से बचाव के लिए दो तरह की वैक्सीन की सिफारिश करता है, जिसमें से पहला निष्क्रिय वैक्सीन का टीका (inactivated vaccine shot) और दूसरा लाइव वैक्सीन की मौखिक खुराक (ओरल वैक्सीन – live oral vaccine) है|

वैक्सीन का टीका (या वैक्सीन शॉट – Vaccine shot)

यह टीका (इंजेक्शन) 2 वर्ष से अधिक आयु के लोग ले सकते हैं| उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आने वाले व्यक्तियों के लिए डॉक्टर इस टीके (वैक्सीन) की 2 साल के बाद बूस्टर डोस (booster dose) लेने की सलाह दे सकता है|

ओरल वैक्सीन (Oral Vaccine)

यह वैक्सीन 6 साल से अधिक उम्र के लोगों को दी जा सकती है| यह वैक्सीन 4 कैप्सूल के पैक में आती है, और इसमें एक कैप्सूल को खाने के दो दिन के अतराल (अल्टरनेट डेज) पर दूसरा कैप्सूल लेना होता है| ये कैप्सूल खाना खाने से एक घंटे पहले खाने होते हैं| जब आपको किसी हाई टाइफाइड प्रभावित क्षेत्र पर जाना हो तो डॉक्टर आपको आखिरी कैप्सूल एक सप्ताह पहले लेने की सलाह दे सकता है|

उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए डॉक्टर 5 साल के बाद इस वैक्सीन की बूस्टर डोस (खुराक) लेने की सलाह दे सकता है|

वैक्सीन का यह लाइव, ओरल रूप दोनों तरह की वैक्सीन में ज्यादा मजबूत होता है|

वैक्सीन 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं होती, इसलिए खाने-पीने में भी सावधानी बरती जानी चाहिए|

टाइफाइड वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव

वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव भी हो सकते हैं| 100 में से एक व्यक्ति को बुखार का अनुभव हो सकता है| मौखिक (ओरल) वैक्सीन के बाद, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं, और सिरदर्द आदि हो सकता है| हालांकि, दोनों तरह की वैक्सीन के साथ गंभीर दुष्प्रभाव दुर्लभ हैं|

एचआईवी से ग्रस्त रोगी को लाइव, मौखिक खुराक नहीं देनी चाहिए|

टाइफाइड बुखार से बचाव के अन्य उपाय

वैक्सीन के अतिरिक्त कुछ अन्य उपाय भी हैं, जिन्हें अपनाकर आप टाइफाइड बुखार से बचे रह सकते हैं:

  • हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान ख्याल रखना चाहिए| खाना खाने से पहले और शौचालय से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छे से धोना चाहिए|
  • पानी हमेशा उबालकर पिएं| पीने के पानी को पीने से पहले लगभग 15 मिनट तक उबाल कर पीएं|
  • खाद्य पदार्थ पूरी तरह पकाकर ही खाने चाहिएं|
  • खाना खाने के बर्तनों को भी साफ-स्वच्छ पानी से धोना चाहिए|
  • जिन्हें छीलना संभव न हो, उन कच्ची सब्जियों या फलों को नहीं खाना चाहिए|
  • ऐसे बर्फीले पदार्थ, चाहे जितने भी स्वादिष्ट हों, नहीं खाने चाहिए जो कि गंदे पानी से बने हुए हों|
  • यदि बर्फ साफ़ या उबले पानी से न बनी हुई हो तो पेय पदार्थ बिना बर्फ के ही पीने चाहिए|
  • जिन दुकानों/स्थानों में खाद्य पदार्थ/पेय पदार्थ साफ सुथरे न रखे जाते हों, वहां से लेकर न ही खाएं तो बेहतर है| ऐसे खाद्य पदार्थों में टाइफाइड बैक्टीरिया के पनपने की संभावना अधिक रहती है|

टाइफाइड बुखार का इलाज (उपचार) क्या है? – What is the Treatment of Typhoid Fever in Hindi?

typhoid treatment in hindi
टाइफाइड का इलाज

टाइफाइड बुखार के लिए एंटीबायोटिक्स (antibiotics) का इस्तेमाल ही एकमात्र प्रभावी इलाज (उपचार) है| इनमें सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले एंटीबायोटिक्स सिप्रोफ्लोक्सासिन (ciproflaxin) और सेफ्ट्रिएक्सोन (ceftriaxone) हैं|

एजिथ्रोमाइसिन (azithromycin) का भी इसके इलाज के लिए उपयोग किया जाता है|

हालांकि, गर्भवती महिलाओं में सिप्रोफ्लोक्सासिन का उपयोग नहीं किया जाता है|

यदि टाइफाइड बुखार का मरीज (रोगी) आहार की खुराक लेने में सक्षम है, तो उसे मौखिक पुनर्जलीकरण चिकित्सा (oral rehydration therapy) दी जाती है| ताकि उसमें दस्त के कारण होने वाले द्रव (fluid) के नुकसान के बाद द्रव संतुलन (fluid balance) बनाए रखा जा सके|

परंतु यदि मरीज अत्यधिक उल्टी के कारण मौखिक रूप से कुछ भी नहीं खा पा रहा है, तो द्रव संतुलन को बनाए रखने और संक्रमण को दूर करने के लिए उसे इंट्रावेनस (intravenous) आधारित द्रव पदार्थ और दवाएं दी जाती हैं|

टाइफाइड बुखार के गंभीर मामलों में कई बार आंतों में छेद भी हो जाता है, जिसे सिर्फ सर्जरी के द्वारा ही ठीक किया जा सकता है|

टाइफाइड बुखार में खानपान कैसा होना चाहिए? – What should be the Diet in Typhoid Fever in Hindi?

टाइफाइड बुखार से ग्रस्त होने पर पाचन या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (GI) से संबंधित समस्याएं होती हैं| इस इंफेक्शन के मुख्य लक्षणों में भूख न लगना, दस्त और मतली आदि शामिल हैं|

अतः एक स्वस्थ और संतुलित आहार लेकर आप इस बुखार को आसानी से मैनेज कर सकते हैं| इस बुखार में आपको आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों का ही सेवन करना चाहिए|

संतुलित आहार के लिए आपको अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स, फैट और प्रोटीन के संतुलन को बनाए रखने की आवश्यकता होती है|

इसीलिए आहार विशेषज्ञ भी इसमें कम अंतराल पर थोडा थोडा सुपाच्य भोजन करने की सलाह देते हैं|

टाइफाइड बुखार के लक्षणों को कम करने और इसकी उपचार प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए मैं आगे आपको बता रहा हूँ कि आपको कौन से आहार खाने चाहिए और कौन से नहीं|

typhoid diet in hindi
टाइफाइड में आहार

ये आहार खाने चाहिए:

उच्च कैलोरी आहार

टाइफाइड बुखार में वजन काफी कम हो जाता है| इसलिए इस बुखार में उच्च कैलोरी युक्त आहार (high calorie diet) लेने की सिफारिश की जाती है| उच्च कैलोरी युक्त आहार के सेवन से वजन फिर से बढ़ सकता है| और यह बीमारी के दौरान अतिरिक्त कैलोरीज की जरूरत को पूरा करता है|

उच्च कैलोरी युक्त आहार में केला, उबले हुए आलू आदि शामिल हैं|

अर्ध-ठोस भोजन

टाइफाइड बुखार के मरीज के लिए अर्ध-ठोस भोजन (semi-solid food) पचाना आसान होता है| उच्च कार्बोहाइड्रेट की मात्रा वाले खाद्य पदार्थ खाना फायदेमंद हो सकता है| इनमें उबले हुए आलू, चावल, आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है|

तरल पदार्थ

तरल पदार्थ का सेवन करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि टाइफाइड में तेज बुखार और दस्त होते हैं, जो आपमें निर्जलीकरण (dehydration) का कारण बन सकते हैं| इसलिए तरल पदार्थ जैसे पानी, जूस, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए| उचित द्रव संतुलन बनाए रखने के लिए पूरे दिन में तरल पदार्थ की कम से कम 3 से 4 लीटर तक की मात्रा का सेवन करना चाहिए|

ओमेगा-3 फैटी एसिड

ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है|

इलेक्ट्रोलाइट्स

इस बुखार में इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) की अत्यधिक हानि होती है, अतः इसकी भरपाई के लिए आपको सूप, फलों के रस, ओआरएस घोल (ORS solution) आदि का सेवन करना चाहिए|

प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ

आपको अपने भोजन में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे पनीर, फलियां, आदि को भी जरूर शामिल करना चाहिए|

ये आहार न खाएं

घी, मक्खन और तले हुए पदार्थ

घी, मक्खन और तले हुए पदार्थ खाने से परहेज करना चाहिए|

उच्च फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ

उच्च फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ आपके पाचन तंत्र को परेशान कर सकते हैं, अतः इन्हें न खाएं तो बेहतर है|

मसालेदार और तीखे पदार्थ

मसालेदार, और तीखे स्वाद वाले पदार्थ का भी सेवन नहीं करना चाहिए|

लाल मिर्च, सिरका, आदि का भी सेवन नहीं करना चाहिए|

गैस करने वाली सब्जियां

इसके अतिरिक्त शिमला मिर्च जैसी सब्जियां, जो गैस का कारण बनती हैं, का भी सेवन नहीं करना चाहिए|

अकसर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: टाइफाइड बुखार की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

उत्तर: इस बुखार के लिए सबसे अच्छी दवा एंटीबायोटिक्स ही है, इनमें सिप्रोफ्लोक्सासिन और सेफ्ट्रिएक्सोन का अधिक इस्तेमाल किया जाता है|

प्रश्न: क्या टाइफाइड बुखार को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है?

उत्तर: हां, इस बुखार को एंटीबायोटिक्स दवाओं की मदद से पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है|



अस्वीकरण (DISCLAIMER): इस लेख में जानकारी आपके ज्ञान के लिए दी गयी है| किसी भी उपाय / नुस्खे / दवा आदि को इस्तेमाल करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर कर लें, क्योंकि वो आपके स्वास्थ्य के बारे में ज्यादा जानता है| हमारे किसी उपाय / नुस्खे / दवा आदि के इस्तेमाल से यदि किसी को कोई नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी|


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