माइग्रेन (अधकपारी) के कारण, लक्षण, व इलाज Migraine in Hindi

क्या आपको पूरे दिन तेज सिरदर्द रहता है? या क्या यह आपके सिर के एक तरफ धमक (throbbing) के साथ होता है? या क्या आपको सिरदर्द के साथ मतली और उल्टी का अनुभव भी होता है? अथवा क्या यह आपको प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशील बनाता है?

अगर ऐसा है तो आप माइग्रेन से पीड़ित हो सकते हैं, जो एक प्रकार का सिरदर्द है और मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन (chemical imbalances) के कारण होता है।

इस लेख में, मैं आपको माइग्रेन (अधकपारी) के लक्षण, कारण, निदान, जोखिम कारक, प्रकार, ट्रिगर, और उपाय तथा इस का इलाज (Migraine symptoms, causes, diagnosis, risk factors, types, triggers, and treatment in hindi) आदि की पूरी जानकारी प्रदान करूंगा।

माइग्रेन (अधकपारी) एक सामान्य प्रकार की न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसके परिणामस्वरूप काफी दर्द और परेशानी हो सकती है। यह स्थिति घंटों या दिनों तक बनी रह सकती है। मध्यम से गंभीर सिरदर्द के आवर्ती हमले (recurring attacks), जो अक्सर मतली, उल्टी, तथा प्रकाश और ध्वनि के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ होते हैं, माइग्रेन की विशेषता है। इसका दर्द काफी अक्षम और दर्दनाक हो सकता है, जो लोगों को उनकी सामान्य दैनिक गतिविधियाँ करने से रोक सकता है।

माइग्रेन प्रत्येक 5 महिलाओं में से 1 को और प्रत्येक 15 पुरुषों में से 1 को प्रभावित करता है (1)। यह स्थिति आमतौर पर वयस्कता के शुरुआत (early adulthood) में शुरू होती है।

कुछ लोगों को एक चेतावनी लक्षण (warning symptom) का अनुभव होता है, जिसे ऑरा (aura) के रूप में जाना जाता है और जो सिरदर्द से पहले या उसके साथ होता है। ऑरा (aura) में बोलने में कठिनाई, विजुअल डिस्टर्बेंस (जैसे प्रकाश की चमक), या अन्य डिस्टर्बेंस (जैसे चेहरे के एक तरफ झुनझुनी) हो सकती हैं।

हालाँकि माइग्रेन को दवाओं से पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, फिर भी किसी व्यक्ति के लक्षणों को कम करने और उन्हें पीड़ा से राहत देने के लिए इसका इलाज किया जा सकता है।

माइग्रेन का सिरदर्द मौत का कारण नहीं बनता है। माइग्रेन रिसर्च फाउंडेशन (Migraine Research Foundation) के अनुसार, माइग्रेन से पीड़ित लोग अक्सर दर्द को कम करने में अच्छे होते हैं। परिणामस्वरूप, इससे पीड़ित 5 में से 1 से अधिक व्यक्ति डॉक्टर द्वारा उपेक्षित महसूस करता है; उनका गलत निदान किया जा सकता है, अपर्याप्त इलाज किया जा सकता है या यह बताया जा सकता है कि उन्हें वास्तव में माइग्रेन नहीं है।

माइग्रेन-अधकपारी-के-लक्षण-migraine-symptoms-ke-lakshan-in-hindi

अधकपारी अथवा माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लक्षण (migraine symptoms in hindi) आमतौर पर 4 अलग-अलग चरणों से गुजरते हैं, जैसे प्रो-ड्रोम (pro-drome), ऑरा (aura), अटैक (attack) और पोस्ट-ड्रोम (post-drome)। जरूरी नहीं कि इससे पीड़ित हर व्यक्ति इन चरणों से गुजरे। कुछ लोग इन सभी चरणों को महसूस कर सकते हैं और नहीं भी कर सकते। आइए इन सभी 4 चरणों (stages) के लक्षणों को समझें।

स्टेज (Stage)विवरण (Description)लक्षण (Symptoms)
प्रो-ड्रोम (Pro-drome)जिस व्यक्ति को माइग्रेन है, उसे आगामी माइग्रेन (upcoming migraine) के 1 या 2 दिन पहले कुछ शरीर में सूक्ष्म परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। यह माइग्रेन की प्रारंभिक चेतावनी (initial warning) है।  -बार-बार उबासी आना -शरीर में विभिन्न जगह द्रव की अधिकता (fluid retention)
-पेशाब का अधिक आना (increased urination)
-गर्दन में अकड़न -फूड क्रेविंग (food cravings) या भूख की कमी (lack of appetite)
-मनोदशा में बदलाव, जैसे अवसाद से उत्साह में बदलाव
कब्ज या दस्त
-ब्लोटिंग (bloating)
-तीव्र प्यास
-थकान
-प्रकाश, ध्वनि और गंध के प्रति संवेदनशील होना
ऑरा (Aura)माइग्रेन से पहले या उसके दौरान ऑरा (Aura) की स्टेज उत्पन्न हो सकती है। आमतौर पर, यह 5 से 20 मिनट की अवधि के भीतर धीरे-धीरे शुरू होती है और 60 मिनट तक चल सकती है। इस चरण के लक्षण आपके तंत्रिका तंत्र (nervous system) से उत्पन्न होते हैं और आमतौर पर इसमें आपकी दृष्टि (vision) शामिल होती है।-बोलने में कठिनाई
-चेहरे या शरीर के एक तरफ सुन्नता या कमजोरी
-पैरों या बांहों में सुइयां चुभने का अहसास होना
-दृष्टि हानि (vision loss)
-विजुअल डिस्टर्बेंस (जैसे प्रकाश की चमक, चमकीले धब्बे या विभिन्न आकृतियाँ देखना)
-गंध, स्वाद या स्पर्श में परिवर्तन
-कानों में घंटियाँ बजना (ringing in ears)
अटैक (Attack) माइग्रेन का अटैक एक महीने में बहुत कम या कई बार हो सकता है। माइग्रेन का दौरा कितनी बार होगा, यह व्यक्ति-दर-व्यक्ति में पूरी तरह भिन्न होता है। यदि उपचार न किया जाए तो यह 4 से 72 घंटों तक रह सकता है।-मतली और उल्टी
-आपको ध्वनि, प्रकाश, गंध और स्पर्श के प्रति संवेदनशीलता हो सकती है
-धमक के साथ सिर में दर्द (throbbing pain) होता है
-आमतौर पर आपके सिर के एक तरफ दर्द होता है, लेकिन दोनों तरफ भी हो सकता है।
पोस्ट-ड्रोम (Post-drome) यह अवस्था माइग्रेन अटैक (migraine attack) के 1 दिन बाद तक रहती है।-आप भ्रमित, और थका हुआ महसूस कर सकते हैं
-कुछ लोग उत्तेजित महसूस करते हैं
-मांसपेशियों में दर्द या कमजोरी
-अचानक सिर हिलाने से थोड़ी देर के लिए फिर से दर्द हो सकता है  

माइग्रेन के कारणों को अभी भी समझने की जरूरत है। कुछ पर्यावरणीय और आनुवंशिक कारक हैं जो माइग्रेन (अधकपारी) का कारण बन सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, माइग्रेन के एपिसोड (episodes of migraine) मस्तिष्क में होने वाले परिवर्तनों के कारण हो सकते हैं, जिनका रक्त वाहिकाओं, रसायनों के संतुलन (balance of chemicals) और तंत्रिकाओं के संचार के तरीके पर प्रभाव पड़ता है।

कुछ आनुवंशिक कारक जैसे पारिवारिक इतिहास भी यह रोग पैदा करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

सेरोटोनिन (serotonin) और अन्य न्यूरोट्रांसमीटर, जैसे कैल्सीटोनिन जीन-रिलेटेड पेप्टाइड (calcitonin gene-related peptide), भी माइग्रेन पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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माइग्रेन के दौरे (migraine attacks in hindi) विभिन्न कारकों से शुरू हो सकते हैं, जिन्हें माइग्रेन के ट्रिगर कहा जाता है। सामान्य माइग्रेन ट्रिगर्स (common migraine triggers in hindi) में निम्नलिखित शामिल हैं:

1) फूड्स (Foods)

नमकीन और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (processed foods) के साथ-साथ पुराने पनीर के उपयोग से भी माइग्रेन शुरू हो सकता है।

2) दवाएं (Medications)

वैसोडिलेटर्स (जैसे नाइट्रोग्लिसरीन), नींद की गोलियाँ और मौखिक गर्भ निरोधकों (oral contraceptives) सहित कुछ दवाएं माइग्रेन को बढ़ा सकती हैं।

3) संवेदी उत्तेजनाएँ (Sensory stimuli)

अधकपारी (migraine in hindi) तेज या चमकती रोशनी या तेज़ आवाज़ से प्रेरित हो सकता है। इसके अलावा पेंट थिनर, परफ्यूम आदि की तेज गंध कुछ व्यक्तियों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती है।

4) फ़ूड एडिटिव्स (Food additives)

अधकपारी को ट्रिगर करने वाले खाद्य पदार्थों में प्रिजेर्वेटिव मोनोसोडियम ग्लूटामेट (monosodium glutamate) और स्वीटनर एस्पार्टेम (aspartame) शामिल हैं, जो कई खाद्य पदार्थों में पाए जा सकते हैं।

5) भौतिक कारक (Physical factors)

माइग्रेन तीव्र शारीरिक परिश्रम से भी हो सकता है, जिसमें यौन गतिविधि भी शामिल है।

6) नींद में बदलाव (Sleep changes)

नींद की कमी या बहुत अधिक सोने के कारण भी माइग्रेन हो जाता है।

7) मौसमी परिवर्तन (Weather changes)

बैरोमीट्रिक प्रेशर (barometric pressure) या मौसम में बदलाव भी अधकपारी का कारण बन सकता है।

8) तनाव (Stress)

कोई भी तनाव, चाहे वह व्यक्तिगत या व्यावसायिक जीवन से संबंधित हो, अधकपारी (migraine in hindi) का कारण बन सकता है।

9) पेय (Drinks)

शराब का सेवन (मुख्य रूप से वाइन), और अत्यधिक कैफीन (जैसे कॉफी) का सेवन भी कभी-कभी माइग्रेन (अधकपारी) का कारण बनता है।

10) महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन (Hormonal changes in women)

महिलाओं को मासिक धर्म चक्र, रजोनिवृत्ति और गर्भावस्था के दौरान (एस्ट्रोजन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण) माइग्रेन का अनुभव हो सकता है।

कुछ विशेष स्थितियों वाले लोगों में माइग्रेन विकसित होने का खतरा अधिक होता है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

1) लिंग (Gender)

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को माइग्रेन होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।

2) आयु (Age)

यह रोग किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है, लेकिन अधिकतर देखा गया है कि किसी भी व्यक्ति में पहला माइग्रेन किशोरावस्था में ही देखने को मिलता है।

माइग्रेन आपके 30 के दशक के दौरान चरम पर होता है, और बाद के दशकों में धीरे-धीरे कम हो जाता है।

3) परिवार का इतिहास (Family history)

माइग्रेन से पीड़ित 5 में से 4 लोगों के परिवार के अन्य सदस्यों को भी माइग्रेन होता है। जिन बच्चों के माता-पिता में से किसी एक को इस प्रकार के सिरदर्द का इतिहास रहा है, उनमें इसे होने की 50% संभावना होती है। और यदि माता-पिता दोनों को माइग्रेन है, तो जोखिम 75% तक बढ़ जाता है।

4) धूम्रपान (Smoking)

जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें माइग्रेन के अटैक (migraine attacks) की संभावना अधिक होती है।

5) तनाव (Stress)

उच्च तनाव स्तर वाले लोगों को माइग्रेन अधिक होता है।

6) अन्य चिकित्सीय स्थितियाँ (Other medical conditions)

बाइपोलर डिसऑर्डर (bipolar disorder), नींद संबंधी विकार और मिर्गी (epilepsy) भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

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न्यूरोलॉजिस्ट (सिरदर्द के इलाज में विशेषज्ञता वाला डॉक्टर) आपके लक्षणों, चिकित्सा इतिहास (medical history), पारिवारिक इतिहास (family history), तथा शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल परीक्षा के आधार पर माइग्रेन का निदान करने में मदद कर सकता है।

इसकी गंभीरता के अनुसार, न्यूरोलॉजिस्ट आपको जीवनशैली में कुछ बदलाव का सुझाव देगा या दवाएं लिखेगा। लेकिन यदि आपकी स्थिति जटिल है या अचानक गंभीर हो जाती है, तो वह आपके दर्द के लिए अन्य स्वास्थ्य स्थितियों की संभावना को दूर करने के लिए कुछ परीक्षणों का सुझाव देगा। इन परीक्षणों में शामिल हैं:

कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन (Computerized Tomography Scan)

सीटी स्कैन डॉक्टरों को मस्तिष्क में रक्तस्राव, मस्तिष्क क्षति, संक्रमण, ट्यूमर, या किसी अन्य स्वास्थ्य स्थिति का निदान करने में मदद करता है, जो सिरदर्द का कारण हो सकता है

एमआरआई (Magnetic Resonance Imaging – MRI)

एमआरआई संक्रमण, मस्तिष्क में रक्तस्राव, स्ट्रोक, ट्यूमर, तथा तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क की अन्य स्थितियों का निदान करने में मदद करता है।

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माइग्रेन कई प्रकार का हो सकता है। इसके सबसे आम प्रकारों में ऑरा (संवेदी परिवर्तन) के बिना माइग्रेन (जिसे कॉमन माइग्रेन कहा जाता है), तथा ऑरा (aura) के साथ माइग्रेन (जिसे क्लासिक माइग्रेन कहा जाता है), शामिल हैं।

माइग्रेन से पीड़ित कई व्यक्तियों में एक से अधिक प्रकार का माइग्रेन हो सकता है।

माइग्रेन के प्रकार इस प्रकार हैं:

1) ऑरा (aura) के साथ माइग्रेन (क्लासिक माइग्रेन) – [Migraine with aura (Classical migraine) in hindi]

ऑरा संवेदी, मोटर और वाक् लक्षणों (sensory, motor and speech symptoms) का एक समूह है, जो आमतौर पर माइग्रेन के एपिसोड (migraine episode) के शुरुआती चरणों में चेतावनी संकेतों (warning signals) की तरह कार्य करता है। माइग्रेन सिरदर्द से पीड़ित लगभग 15 से 20 प्रतिशत लोगों को ऑरा (aura) का अनुभव होता है।

2) बिना ऑरा वाला माइग्रेन (कॉमन माइग्रेन) – [Migraine without aura (common migraine) in hindi]

इस प्रकार के माइग्रेन सिरदर्द से पीड़ित लोगों को इसके एपिसोड से पहले कोई सेंसरी डिस्टर्बेंस (sensory disturbance) का अनुभव नहीं होता है। लक्षण समान हैं, लेकिन ऑरा वाला चरण (aura phase) नहीं होता है।

3) ऑप्थाल्मोप्लेजिक माइग्रेन – [Ophthalmoplegic migraine in hindi]

इस प्रकार के माइग्रेन के कारण आपकी आंख के आसपास दर्द होता है। इसके अलावा, ऑप्थाल्मोप्लेजिक माइग्रेन में आपकी आंखों की मांसपेशियां भी लकवाग्रस्त हो सकती हैं। व्यक्ति में अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे दोहरी दृष्टि (double vision), पलकों का लटकना (droopy eyelid) आदि।

4) स्टेटस माइग्रेनोसस – [Status migrainosus in hindi]

यह माइग्रेन का सबसे गंभीर रूप है जिसमें मतली और दर्द बहुत गंभीर होता है। आमतौर पर यह माइग्रेन 72 घंटे से अधिक समय तक रहता है। मेडिकेशन विदड्रॉल (medication withdrawal) या कुछ दवाओं का उपयोग, इस प्रकार के माइग्रेन का कारण बन सकते हैं।

5) ब्रेनस्टेम ऑरा के साथ माइग्रेन – [Migraine with brainstem aura in hindi]

इस प्रकार का माइग्रेन हार्मोनल परिवर्तनों से जुड़ा हुआ है और मुख्य रूप से युवा वयस्क महिलाओं (young adult women) में देखा जा सकता है। इस प्रकार के माइग्रेन में सिरदर्द से पहले चक्कर आना, दोहरी दृष्टि (double vision), अस्पष्ट वाणी (slurred speech), या संतुलन की हानि (loss of balance) हो सकता है। और दर्द आपके सिर के पिछले हिस्से को प्रभावित कर सकता है। ये लक्षण आम तौर पर अचानक होते हैं, तथा कानों में घंटियाँ बजना (ringing in the ears), ठीक से बोलने में असमर्थता (inability to speak properly), और उल्टी के साथ आ सकते हैं।

6) ऑप्थेल्मिक माइग्रेन (नेत्र संबंधी माइग्रेन) – [Ophthalmic migraine in hindi]

ऑप्थेल्मिक माइग्रेन को रेटिनल या ऑक्यूलर माइग्रेन (retinal or ocular migraine in hindi) भी कहा जाता है। इससे आपकी एक आंख में अस्थायी, आंशिक या पूर्ण दृष्टि हानि होती है, साथ ही आंख के पीछे हल्का दर्द होता है जो आपके सिर के बाकी हिस्सों तक फैल सकता है। आपको इस प्रकार के माइग्रेन के बारे में हमेशा डॉक्टर को बताना चाहिए क्योंकि यह अधिक गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

7) हेमिप्लेजिक माइग्रेन – [Hemiplegic migraine in hindi]

हेमिप्लेजिक माइग्रेन में आपके शरीर के एक तरफ अस्थायी पक्षाघात (हेमिप्लेजिया) अथवा न्यूरोलॉजिकल या संवेदी परिवर्तन होते हैं। सिरदर्द की शुरुआत झुनझुनी की अनुभूति (tingling sensation), अस्थायी सुन्नता (temporary numbness), चक्कर आना, आपके शरीर के एक तरफ की कमजोरी या दृष्टि में बदलाव (vision changes) से जुड़ी हो सकती है।

8) वेस्टिबुलर माइग्रेन – (Vestibular migraine in hindi)

इस प्रकार का माइग्रेन मोशन सिकनेस के इतिहास वाले लोगों में देखा जा सकता है। इसमें आपको संतुलन संबंधी समस्याएं, उल्टी, मतली, चक्कर आदि लक्षण सिरदर्द के साथ या उसके बिना भी हो सकते हैं।

9) एब्डॉमिनल माइग्रेन – (Abdominal migraine in hindi)

इस प्रकार के माइग्रेन के बारे में जानकारी का अभाव है। लेकिन ज्यादातर यह 14 साल से कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है और समय के साथ यह क्लासिक माइग्रेन (classic migraine) का रूप ले सकता है। इस प्रकार के माइग्रेन के लक्षणों में उल्टी, मतली, पेट दर्द आदि शामिल हैं।

10) साइलेंट माइग्रेन – (Silent migraine in hindi)

इस प्रकार के माइग्रेन में व्यक्ति को सिरदर्द तो नहीं होता लेकिन ऑरा (aura) संबंधी लक्षण होते हैं। इसे एसेफैल्जिक माइग्रेन (acephalgic migraine) भी कहा जाता है।

11) मासिक धर्म संबंधी माइग्रेन – (Menstrual migraine in hindi)

इस प्रकार का माइग्रेन मुख्य रूप से तब संदर्भित होता है, जब सिरदर्द का संबंध महिला के मासिक धर्म चक्र (menstruation cycle) से होता है।

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माइग्रेन एक तंत्रिका संबंधी विकार (neurological disorder) है, जो बहुत तेज सिरदर्द का कारण बनता है। दर्द एक बार में घंटों, दिनों या हफ्तों तक भी रह सकता है। हालाँकि माइग्रेन का कोई इलाज (migraine ka ilaj) नहीं है, लेकिन इसे प्रबंधित करने में मदद के लिए कई अलग-अलग उपचार विकल्प (treatment options) उपलब्ध हैं।

माइग्रेन के इलाज (migraine treatment in hindi) में पहला कदम यह पहचानना है, कि आपके माइग्रेन अटैक्स (migraine attacks) का कारण क्या है। यह मौसम बदलने या कुछ खाद्य पदार्थ खाने जितना आसान हो सकता है। यदि आप पता लगा सकते हैं कि आपके माइग्रेन का कारण क्या है और उन ट्रिगर से बचें, तो संभावना है कि आपका माइग्रेन कम बार होगा।

एक अन्य विकल्प यह है कि माइग्रेन के दौरे (migraine attack) के लक्षणों का अनुभव होने से पहले एस्पिरिन (aspirin) और इबुप्रोफेन (ibuprofen) जैसी निवारक दवाएं लें। यदि लक्षण प्रकट होने से पहले ही इसका सेवन कर लिया जाए तो दर्द से कुछ राहत मिल सकती है। हालाँकि, ये दवाएँ हमेशा काम नहीं करती हैं, और डॉक्टर से सलाह किए बिना इनका उपयोग कभी नहीं किया जाना चाहिए।

जो लोग क्रोनिक माइग्रेन (chronic migraine in hindi) से पीड़ित हैं, और जिनके रोग को केवल ओवर-द-काउंटर दवाओं या जीवनशैली में अन्य बदलावों से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है, उनके लिए व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्रिप्शन दवाएं (prescription medications) निर्धारित की जा सकती हैं। इनमें से कुछ में ट्रिप्टान (जो मस्तिष्क में दर्द के रास्ते को अवरुद्ध करती हैं), कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (जो सूजन को कम करती हैं), एर्गोटामाइन (जो मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं को संकुचित करती हैं), और ट्राइसाइक्लिक दवाएं शामिल हैं।

माइग्रेन के लिए उपचार योजना – (Treatment plan for migraine in hindi)

माइग्रेन के लिए उपचार योजना (treatment plan for migraine in hindi) निम्नलिखित में से किसी एक का संयोजन हो सकती है:

1) जीवनशैली में बदलाव जैसे माइग्रेन के ट्रिगर (migraine triggers) से बचना, तनाव प्रबंधन (stress management) आदि।

2) ओवर-द काउंटर (over-the counter) दर्द या माइग्रेन की दवाएं जैसे एसिटामिनोफेन (acetaminophen), या नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (Nonsteroidal anti-inflammatory drugs), आदि।

3) माइग्रेन सिरदर्द की आवृत्ति (frequency of migraine headaches) को रोकने या कम करने के लिए आमतौर पर प्रतिदिन चिकित्सकीय दवाएं लेना।

4) माइग्रेन का दौरा शुरू होते ही माइग्रेन की दवा (migraine medicines) लेना इसे गंभीर होने से बचाने और लक्षणों से राहत पाने के लिए लेना चाहिए।

5) परामर्श (Counselling)

6) यदि माइग्रेन सिरदर्द का संबंध महिला के मासिक धर्म चक्र (menstruation cycle) से है, तो हार्मोन थेरेपी (hormone therapy)।

7) मतली या उल्टी के इलाज के लिए प्रिस्क्रिप्शन दवाएं।

8) वैकल्पिक उपचार (alternative treatment) जिसमें एक्यूपंक्चर (acupuncture), एक्यूप्रेशर (acupressure), ध्यान (meditation) आदि शामिल हैं।

माइग्रेन (अधकपारी) के घरेलू उपाय – (Home Remedies for Migraine in hindi)

माइग्रेन (अधकपारी) के निम्नलिखित घरेलू उपाय इसके लक्षणों का इलाज करने में मदद कर सकते हैं:

  • आवश्यकता पड़ने पर सोना
  • अंधेरे और शांत कमरे में रहना
  • फ्लेक्सिबल कोल्ड मास्क या पैक (flexible cold masks or packs) का उपयोग करना

दोस्तो, माइग्रेन का प्रभावी उपचार (इलाज) कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे आपकी उम्र, माइग्रेन का दौरा कितनी बार आता है, माइग्रेन का प्रकार, इसकी गंभीरता, क्या इसमें उल्टी या मतली के लक्षण हैं, अन्य दवाएं लेना या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां।

यदि आपको माइग्रेन का निदान किया जाता है, तो ऐसे तरीके हैं जो आपको माइग्रेन के हमले को रोकने में मदद कर सकते हैं जैसे:

  • नियमित व्यायाम तनाव के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।
  • रिलैक्सेशन स्किल्स (relaxation skills) सीखें और उन्हें क्रियान्वित करने का प्रयास करें।
  • जीवन में तनाव के स्तर को कम करने के लिए हमेशा प्रयास करें और काम करें।
  • उन स्थितियों, गंधों (smells) और खाद्य पदार्थों को जानने की कोशिश करें, जिनके परिणामस्वरूप माइग्रेन का दौरा (migraine attacks) पड़ता है, और फिर उनसे बचें।
  • जहां तक संभव हो समय पर भोजन करें या भोजन के साथ समझौता न करें।
  • धूम्रपान से बचें या इसे छोड़ें।
  • गुणवत्तापूर्ण तथा पर्याप्त नींद माइग्रेन और समग्र स्वास्थ्य के लिए सहायक है
  • अपने हाइड्रेशन स्तर (hydration level) पर ध्यान दें क्योंकि निर्जलित (dehydrated) रहने से सिरदर्द हो सकता है और चक्कर आ सकते हैं।

माइग्रेन (अधकपारी) की जटिलताएँ (complications of migraine in hindi) निम्नलिखित हैं:

1) दवा के अति प्रयोग से सिरदर्द – (Medication Overuse Headache In Hindi)

माइग्रेन सिरदर्द के लिए अक्सर दर्द निवारक दवाएं लेने से दवा के अति प्रयोग से सिरदर्द (medication-overuse headaches) हो सकता है। इसका जोखिम एसिटामिनोफेन, एस्पिरिन और कैफीन के संयोजन से सबसे अधिक होता है।

यह सिरदर्द तब होता है जब दवाएं दर्द से राहत देना बंद कर देती हैं और सिरदर्द का कारण बनने लगती हैं।

यदि आप महीने में 14 दिन से अधिक इबुप्रोफेन या एस्पिरिन अथवा महीने में नौ दिन से अधिक ट्रिप्टान (अलमोट्रिप्टान या सुमैट्रिप्टन) का सेवन करते हैं, तो दवा के अति प्रयोग से सिरदर्द (medication-overuse headaches in hindi) हो सकता है।

2) माइग्रेनस इंफार्क्शन – (Migrainous infarction in hindi)

दुर्लभ मामलों में, माइग्रेनस इंफार्क्शन नामक जटिलता उत्पन्न हो सकती है। इस जटिलता में आपको स्ट्रोक हो सकता है, जब आपको माइग्रेन का दर्द हो रहा हो। लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं है जो दिखाता हो कि माइग्रेन स्ट्रोक को ट्रिगर कर सकता है।

3) मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं – (Mental health problems)

माइग्रेन मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बहुत कम जोखिम से भी जुड़ा हुआ है, जैसे:

  • पैनिक डिसऑर्डर (panic disorder)
  • बाइपोलर डिसऑर्डर (bipolar disorder)
  • अवसाद (depression)
  • एंग्जायटी डिसऑर्डर (anxiety disorder)

4) अन्य जटिलताएँ – (Other complications in hindi)

माइग्रेन का इससे ग्रसित होने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। बिना माइग्रेन वाले लोगों की तुलना में माइग्रेन के मरीज़ों को काम से अधिक दिन छुट्टी लेनी पड़ती है।

अत्यंत दुर्लभ मामलों में, हेमिप्लेजिक माइग्रेन (hemiplegic migraine in hindi) कभी-कभी कोमा या अन्य गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।

अचानक और बहुत गंभीर सिरदर्द किसी अन्य, अधिक गंभीर स्थिति, जैसे स्ट्रोक (stroke) या एन्यूरिज्म (aneurysm) का संकेत हो सकता है।

आशा है आपको माइग्रेन (अधकपारी) से जुड़ी सारी जानकारी मिल गई होगी। याद रखें माइग्रेन (अधकपारी) के लक्षण, गंभीरता का स्तर, रोकथाम, निदान और इलाज के तरीके हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। आपकी विशेष स्थिति के लिए प्रभावी उपचार दूसरों के समान नहीं हो सकता है। अपने डॉक्टर के साथ परामर्श करने से स्थिति की गंभीरता का पता लगाने और उचित उपचार में मदद मिल सकती है।


संदर्भ (References):

1) Migraine

https://www.nhs.uk/conditions/migraine/

2) Migraine: Types, Causes, Triggers, Symptoms, & Treatment


अस्वीकरण (Disclaimer):

इस लेख में जानकारी आपके ज्ञान के लिए दी गयी है| किसी भी उपाय/नुस्खे/दवा आदि को इस्तेमाल करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर कर लें, क्योंकि वो आपके स्वास्थ्य के बारे में ज्यादा जानता है|


इन्हें भी पढ़ें :

1) सिरदर्द के कारण, लक्षण, प्रकार, व इलाज Headache in Hindi

2) बेल्स पाल्सी के कारण, लक्षण व इलाज Bell’s Palsy in Hindi


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