सितोपलादि चूर्ण के फायदे Sitopaladi Churna Benefits in Hindi

इस लेख में आपको सितोपलादि चूर्ण (Sitopaladi Churna in hindi) के फायदे, उपयोग, लाभ, घटक द्रव्य (सामग्री), नुकसान (दुष्प्रभाव), अनुशंसित खुराक आदि के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। यदि आप इस चूर्ण के बारे में समग्र जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक पढ़ते रहें।

Table of Contents

सितोपलादि चूर्ण क्या है? – (What is Sitopaladi Churna in Hindi?)

सितोपलादि चूर्ण सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधियों में से एक है, जो चूर्ण और गोली दोनों रूपों में उपलब्ध है। इस चूर्ण को अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे:

  • सितोपलादि पाउडर
  • सितोपलादि चूर्णम

यह आपके शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद है और पाचन तंत्र, श्वसन प्रणाली और प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित विभिन्न बीमारियों का इलाज कर सकता है। यह चूर्ण पल्मोनरी फंक्शन (pulmonary function) में सुधार करने और प्रतिरक्षा को बढ़ाने में सहायक है।

अपने कफ निस्सारक (expectorant) और सूजनरोधी (anti-inflammatory) गुणों के कारण, सितोपलादि चूर्ण श्वसन संबंधी समस्याओं, जैसे निमोनिया (pneumonia), ब्रोंकाइटिस (bronchitis), और श्वसन मार्ग (respiratory tract) के संक्रमण और एलर्जी के प्रबंधन में सहायक है (1)।

सितोपलादि पाउडर 100% प्राकृतिक सामग्री जैसे मिश्री, वंक्षलोचन, पिप्पली, इलायची, और दालचीनी से बना है।

आयुर्वेद के अनुसार, इस चूर्ण में रसायन, तथा वात और कफ दोष को संतुलित करने वाले गुण होते हैं, जो प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) को बढ़ाने और श्वसन मार्ग से बलगम को हटाने में सहायता करते हैं। इसके दीपन (क्षुधावर्धक) और पाचन गुण भी पाचन में सुधार करने और भूख बढ़ाने में सहायक होते हैं।

सितोपलादि चूर्ण के घटक द्रव्य (सामग्री) क्या हैं? – (What are the Ingredients (Composition) of Sitopaladi Churna in Hindi?)

सितोपलादि चूर्ण के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले प्रमुख घटक द्रव्य निम्नलिखित हैं:

घटक द्रव्य का सामान्य नामघटक द्रव्य का वैज्ञानिक नामघटक द्रव्य का अनुपातघटक द्रव्य का प्रतिशत
दालचीनीCinnamomum Zeylanicum1 भाग3.23%
इलाइची (हरी इलायची)Elettaria Cardamomum2 भाग6.45%
पिप्पली (लंबी काली मिर्च)Piper Longum4 भाग12.90%
वंशलोचन (बांस के पेड़ का आंतरिक सफेद भाग)Bambusa arundinacea8 भाग25.81%
सितोपला (मिश्री)—-16 भाग51.61%

घर पर सितोपलादि चूर्ण कैसे बनाएं? – (How to make Sitopaladi Churna at Home in Hindi?)

आप नीचे दिए गए चरणों का पालन करके घर पर सितोपलादि चूर्ण बना सकते हैं:

  • सभी घटक द्रव्यों (जैसे मिश्री, वंशलोचन, दालचीनी, पिप्पली और इलायची) को उपरोक्त अनुपात में अलग-अलग इकट्ठा कर लें।
  • प्रत्येक घटक द्रव्य को अच्छी तरह से पीस लें और उसका पाउडर बना लें।
  • इन्हें साफ सूती कपड़े से छान लें।
  • सभी घटक द्रव्यों के पाउडर को एक साथ अच्छे से मिलाकर, उनका एक समान मिश्रण बना लें।

यह मिश्रण ही सितोपलादि चूर्ण है। अब इस मिश्रण को एक एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख दें।

सितोपलादि चूर्ण की रासायनिक संरचना – (Chemical Composition of Sitopaladi Churna in Hindi)

सितोपलादि चूर्ण में कुछ कार्बनिक और अकार्बनिक तत्व मौजूद होते हैं (2)।

कार्बनिक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट, अमीनो एसिड, टैनिन, अल्कलॉइड, फ्लेवोनोइड, स्टेरॉयड, प्रोटीन और फेनोलिक यौगिक शामिल हैं।

अकार्बनिक तत्वों में सल्फेट, क्लोराइड, लोहा, नाइट्रेट, कार्बोनेट, फॉस्फेट, सोडियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और कैल्शियम शामिल हैं।

सितोपलादि चूर्ण के औषधीय गुण क्या हैं? – (What are the Medicinal Properties of Sitopaladi Churna in Hindi?)

सितोपलादि चूर्ण में निम्नलिखित औषधीय गुण होते हैं:

  • ज्वर नाशक (एंटीपयरेटिक – Antipyretic)
  • एनाल्जेसिक (Analgesic)
  • टॉनिक (Tonic)
  • क्षुधावर्धक (Appetizer)
  • कार्मिनेटिव (Carminative)
  • डिटॉक्सिफायर (Detoxifier)
  • एंटी वाइरल (Antiviral)
  • जीवाणुरोधी (Antibacterial)
  • एंटीऑक्सिडेंट (Antioxidant)
  • इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (Immunomodulatory)
  • पाचन उत्तेजक (Digestive Stimulant)
  • कासरोधक (Antitussive)
  • कफ निस्सारक (Expectorant)
  • ब्रांकोडायलेटर (Bronchodilator)
  • सूजनरोधी (Anti-inflammatory)

सितोपलादि चूर्ण किन शारीरिक स्थितियों में उपयोगी है अथवा इसके चिकित्सीय संकेत क्या हैं? – (What Are The Therapeutic Indications Of Sitopaladi Churna In Hindi?)

सितोपलादि चूर्ण निम्नलिखित शारीरिक स्थितियों में उपयोगी है अथवा इसके निम्नलिखित चिकित्सीय संकेत हैं:

  • दमा (Asthma)
  • मौसमी और एलर्जिक राइनाइटिस (Seasonal and Allergic Rhinitis)
  • व्रण (Ulcer)
  • भूख में कमी (Loss of appetite)
  • सीने में जलन (Heartburn)
  • खाँसी (Cough)
  • जीर्ण जठरशोथ (Chronic gastritis)
  • एसिडिटी (Acidity)
  • शारीरिक शक्ति का अभाव (Lack of physical strength)
  • दुर्बलता (Debility)
  • क्रोनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic bronchitis)
  • यक्ष्मा (Tuberculosis)
  • साइनसाइटिस (Sinusitis)
  • पित्ती (Urticaria)

सितोपलादि चूर्ण के आयुर्वेदिक गुण क्या हैं? – (What are the Ayurvedic Properties of Sitopaladi Churna in Hindi?)

इस चूर्ण के आयुर्वेदिक गुण हैं:

गुण (औषधीय क्रिया)स्निग्ध, लघु
रस (जीभ पर स्वाद)मधुर, कटु
विपाक (पाचन के बाद परिवर्तित अवस्था)मधुर (मीठा)
वीर्य (शक्ति – potency)उष्ण वीर्य (hot potency)
दोष प्रभाववात और कफ दोष को संतुलित करता है, लेकिन पित्त दोष को बढ़ाता है

सितोपलादि चूर्ण की आयुर्वेदिक क्रियाएं क्या हैं? – (What are the Ayurvedic Actions of Sitopaladi Churna in Hindi?)

इस चूर्ण की आयुर्वेदिक क्रियाएं हैं:

  • कफ-वतहार (कफ और वात दोष को संतुलित करता है)
  • दीपन (क्षुधावर्धक)
  • पाचन
  • कासहर (खांसी में राहत देता है)
  • ज्वरघ्न (बुखार से राहत दिलाता है)

सितोपलादि चूर्ण के फायदे और उपयोग क्या हैं? – (What Are The Uses And Benefits of Sitopaladi Churna in Hindi?)

सितोपलादि चूर्ण के मुख्य फायदे और उपयोग इस प्रकार हैं (Sitopaladi Churna ke fayde in hindi):

1) खांसी और सांस की समस्याओं के लिए सितोपलादि चूर्ण के फायदे – (Sitopaladi Churna Benefits For Cough And Respiratory Problems in Hindi)

सितोपलादि चूर्ण खांसी और सांस की समस्याओं के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें शक्तिशाली कासहर (antitussive) गुण होते हैं जो खांसी को शांत करने में सहायता करते हैं। इस चूर्ण के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण श्वसन तंत्र के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी होते हैं (2)। साथ ही सितोपलादि चूर्ण का सेवन उन लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा जो सर्दी-जुकाम, फ्लू, ब्रोंकाइटिस, टीबी (तपेदिक), निमोनिया, और अन्य सांस की बीमारियों से पीड़ित हैं।

आयुर्वेद में खांसी को कास कहते हैं और इसे पांच श्रेणियों में बांटा गया है:

1. वातज कास

यह सूखी खांसी है जो रात में बढ़ जाती है और कुछ बलगम पैदा करती है।

2. पित्तज कास

यह एक खांसी है जो मध्यम बलगम पैदा करती है, तथा इसमें बलगम पीले या हरे रंग की होती है।

3. कफज कास

इस प्रकार की खांसी में बड़ी मात्रा में सफेद और चिपचिपा बलगम बनता है।

4. क्षतज कास

क्षतज कास एक खांसी है जो छाती की चोट से उत्पन्न होती है

5. क्षयज कास

क्षयज कास एक खांसी है जो टीबी (तपेदिक) जैसे पुराने रोगों से उत्पन्न होती है।

इन सभी प्रकार की खांसी में सितोपलादि चूर्ण का सेवन लाभकारी होता है। खांसी के प्रकार के आधार पर इसे विभिन्न सहायक जैसे घी, शहद, आदि के साथ लिया जाता है।

2) एलर्जी के लिए सितोपलादि चूर्ण के फायदे – (Sitopaladi Churna Benefits For Allergies in Hindi)

जिन लोगों को किसी चीज (जैसे पराग, धूल आदि) से एलर्जी होती है, वे उसके संपर्क में आने पर कुछ लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं जैसे नाक बहना, आंखों से पानी आना, आदि। सितोपलादि चूर्ण प्राकृतिक तरीके से एलर्जी के इलाज में मदद करता है।

सितोपलादि चूर्ण के एंटीहिस्टामिनिक गुण (antihistaminic properties) शरीर में इंफ्लेमेटरी मीडिएटर (inflammatory mediators) के निकलने को रोकते हैं और एलर्जी के विभिन्न लक्षणों को नियंत्रित करते हैं।

3) वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स के लिए सितोपलादि चूर्ण के फायदे – (Sitopaladi Churna Benefits For Vocal Cord Nodules in Hindi)

वोकल कॉर्ड्स (vocal cords) के दुरुपयोग से वोकल नोड्यूल्स (vocal nodules) बनते हैं। यदि आप एक ऐसे पेशे में हैं जहाँ आपको ऊँची आवाज में बोलना पड़ता है, तो आपको वोकल नोड्यूल्स की समस्या होने का खतरा बना रहता है।

लेकिन इसे सितोपलादि चूर्ण और अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के संयोजन से आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है। एक अध्ययन के अनुसार इस चूर्ण का सेवन करने से व्यक्ति को लक्षणों से राहत मिल सकती है और वह अपनी मूल आवाज वापस पा सकता है (4)।

4) माइग्रेन के लिए सितोपलादि चूर्ण के फायदे – (Sitopaladi Churna Benefits For Migraine in Hindi)

आप अन्य आयुर्वेदिक दवाओं के साथ सितोपलादि चूर्ण की सही मात्रा का सेवन करके और अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके प्रभावी ढंग से माइग्रेन का प्रबंधन कर सकते हैं, इन बदलावों में प्रमुख हैं (5):

  • शराब के सेवन से परहेज
  • धूम्रपान से परहेज
  • सुबह या शाम की सैर
  • 8 से 9 घंटे की उचित और पर्याप्त नींद

5) एनीमिया के लिए सितोपलादि चूर्ण के लाभ – (Sitopaladi Churna Benefits For Anaemia in Hindi)

एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) या हीमोग्लोबिन की कुल मात्रा में कमी होती है। आयरन की कमी इस स्थिति का सबसे आम कारण है।

चिड़चिड़ापन, थकान, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ आदि एनीमिया के सामान्य लक्षण हैं।

सितोपलादि चूर्ण का उपयोग शरीर द्वारा आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में सहायक है और इसलिए, आयरन की कमी वाले एनीमिया के उपचार में यह चूर्ण फायदेमंद है।

6) पाचन के लिए सितोपलादि चूर्ण के फायदे – (Sitopaladi Churna Benefits For Digestion in Hindi)

सितोपलादि चूर्ण के पाचन और दीपन गुण पाचन क्रिया में सुधार करने में मदद करते हैं। इसके कार्मिनेटिव (carminative) गुण पेट फूलने, गैस बनने की समस्या से राहत प्रदान करने में मदद करते हैं।

7) डायबिटीज के लिए सितोपलादि चूर्ण के लाभ – (Sitopaladi Churna Benefits for Diabetes in Hindi)

रक्त में प्रवेश करने और रक्त शर्करा (blood sugar) के स्तर में वृद्धि करने से पहले पाचन एंजाइम एमाइलेज (amylase) द्वारा जटिल कार्बोहाइड्रेट को सरल शर्करा (simple sugars) में तोड़ दिया जाता है।

कृत्रिम परिवेशीय अध्ययनों (In vitro studies) से पता चला है कि सितोपलादि चूर्ण में शक्तिशाली एमाइलेज निरोधात्मक गुण (amylase inhibitory properties) होते हैं। यह गुण शरीर को इन जटिल कार्बोहाइड्रेट को अवशोषित करने से रोक सकता है और भोजन के बाद रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। हालांकि, मनुष्यों में रक्त शर्करा के स्तर के प्रबंधन के लिए इसका उपयोग करने से पहले इस चूर्ण के मानव अध्ययन की आवश्यकता है।

8) सितोपलादि चूर्ण संक्रमण से बचाने में मदद करता है – (Sitopaladi Churna Helps to Avoid Infections in Hindi)

इस चूर्ण में शक्तिशाली एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो शरीर से बैक्टीरिया को खत्म करने में बहुत सहायक होते हैं। इसमें बायोएक्टिव यौगिक होते हैं, जो घावों के भरने और उनके उपचार में सहायता करते हैं।

इस चूर्ण में मजबूत इम्यून-मॉड्यूलेटरी (immune-modulatory) तत्व होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। अतः सितोपलादि चूर्ण का उपयोग उन बच्चों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें बार-बार ऊपरी श्वसन मार्ग का संक्रमण (upper respiratory tract infections) हो जाता है, क्योंकि यह उनकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और बार-बार होने वाले संक्रमण की प्रवृत्ति को कम करता है।

9) सितोपलादि चूर्ण के अन्य फायदे – (Other Benefits of Sitopaladi Churna in Hindi)

इस चूर्ण के अन्य लाभ इस प्रकार हैं:

1. इस चूर्ण का सेवन फेफड़े, श्वसन मार्ग और नाक की सूजन को कम करने में फायदेमंद है।

2. यह चूर्ण संक्रामक साइनसाइटिस (infective sinusitis) और साइनस कंजेशन (sinus congestion) में भी फायदेमंद है।

3. सितोपलादि चूर्ण पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है। इसलिए, अपच के इलाज के लिए यह सबसे अच्छे उपचारों में से एक है।

4. यह भूख में सुधार करता है और एनोरेक्सिया नर्वोसा (anorexia nervosa) में भी फायदेमंद है।

5. इसका सेवन शरीर को शक्ति प्रदान करता है।

6. अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों को सितोपलादि चूर्ण के सेवन से सांस लेने में आसानी हो सकती है।

7. इस चूर्ण का सेवन श्वसन मार्ग में कफ निर्माण को कम करने के लिए लाभकारी है।

8. अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के साथ सितोपलादि चूर्ण का सेवन गले की खराश को ठीक करता है।

9. सितोपलादि चूर्ण का सेवन टॉन्सिल में सूजन (टॉन्सिलिटिस – tonsillitis) में लाभदायक है।

सितोपलादि चूर्ण के नुकसान (दुष्प्रभाव) क्या हैं? – (What are The Side Effects of Using Sitopaladi Churna in Hindi?)

सितोपलादि चूर्ण को सबसे सुरक्षित आयुर्वेदिक औषधियों में से एक माना जाता है, जिसका अनुशंसित खुराक में सेवन करने पर कोई नुकसान (या दुष्प्रभाव) नहीं होता है।

लेकिन कुछ लोगों को गैस्ट्राइटिस (gastritis) की समस्या हो सकती है, खासकर अगर वे इसका सेवन भोजन से पहले करते हैं।

इसके अलावा, मधुमेह के मरीजों को इस चूर्ण का उपयोग सावधानी से या अपने चिकित्सक से परामर्श करने के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि यह उनके रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित कर सकता है।

सितोपलादि चूर्ण की अनुशंसित खुराक क्या है? – (What is The Recommended Dosage of Sitopaladi Churna in Hindi?)

उम्र, रोग की गंभीरता और रोगी की स्थिति के आधार पर सितोपलादि चूर्ण की प्रभावी चिकित्सीय खुराक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकती है।

इस चूर्ण की सामान्य खुराक 1 से 2 ग्राम दिन में दो से तीन बार है। अधिमानतः इसका सेवन भोजन के बाद करना चाहिए।

शारीरिक स्थिति के कारण के आधार पर इस चूर्ण का सेवन उपयुक्त सहायक (जैसे शहद, घी, आदि) के साथ किया जाता है।

सितोपलादि चूर्ण के साथ बरती जाने वाली सावधानियां – (Precautions to be Taken With Sitopaladi Churna in Hindi)

सितोपलादि चूर्ण का सेवन करते समय जो सावधानियां बरतनी चाहिए वे इस प्रकार हैं:

  • यदि इस चूर्ण को चिकित्सक के परामर्श से निर्धारित मात्रा में लिया जाए, तो इसका सेवन विशेष रूप से फायदेमंद साबित होता है।
  • माइक्रोबियल वृद्धि (microbial growth) और घटक द्रव्यों (सामग्री) के क्षरण को रोकने के लिए इस औषधि को एक एयर-टाइट कंटेनर में संग्रहित किया जाना चाहिए।
  • इस चूर्ण में मिश्री भी एक घटक द्रव्य होती है। इसलिए अगर आपको हाई ब्लड शुगर है, तो डॉक्टर से सलाह करके ही इसका सेवन करना चाहिए।
  • सितोपलादि चूर्ण को खाली पेट लेने से बचें।
  • यह चूर्ण गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं द्वारा लिया जा सकता है, लेकिन उन्हें इसका सेवन अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करने के बाद ही करना चाहिए।

तो इस लेख में हमने सितोपलादि चूर्ण (Sitopaladi Churna in hindi) नामक इस लाभकारी आयुर्वेदिक सूत्रीकरण के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर ली है। इसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं, लेकिन मैं हमेशा आपको सुझाव देता हूं कि किसी भी उद्देश्य के लिए इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। मुझे उम्मीद है कि आपको यह लेख पढ़कर अच्छा लगा होगा और यह आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग कैसे करें? – (How to use Sitopaladi Churna in hindi?)

सितोपलादि चूर्ण की अनुशंसित खुराक (मात्रा) दिन में एक या दो बार शहद या घी के साथ लें।

इस चूर्ण को खाली पेट लेने से बचें और इस चूर्ण के सेवन के कम से कम 30 मिनट बाद तक कोई भी खाद्य पदार्थ का सेवन न करें ताकि इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके।

क्या सितोपलादि चूर्ण का उपयोग कोविड संक्रमणों में किया जा सकता है? – (Can sitopaladi churna be used in Covid Infections in hindi?)

एक मामले की रिपोर्ट के अनुसार, श्वसन प्रणाली के लिए इसके लाभों के कारण यह चूर्ण पोस्ट-कोविड फेफड़ों की जटिलताओं (Post-Covid Lung Complications) में फायदेमंद हो सकता है (6)।

इस चूर्ण को परिणाम दिखाना शुरू करने में कितना समय लगता है? – (How much time does it take to start showing results in hindi?)

यह इस चूर्ण की खुराक (या मात्रा) और इसके साथ उपयोग की जा रही अन्य दवाओं पर निर्भर करता है। आमतौर पर परिणाम दिखने में एक से दो सप्ताह का समय लगता है।



संदर्भ (References):

1) Quality Assessment of Sitopaladi Churna Using High-Performance Liquid Chromatography Coupled with Multivariate Analysis

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/33015709/

2) STUDY OF SITOPALADI CHURNA WITH REFERENCE TO ITS PHYSICOCHEMICAL, PHYTOCHEMICAL & MICROBIAL ANALYSIS

https://www.worldwidejournals.com/global-journal-for-research-analysis-GJRA/fileview/November_2017_1509787129__86.pdf

3) Sitopaladi Churna: Uses, Benefits, Ingredients, Side Effects – My Health By Health

4) A rare case report: Ayurvedic management of vocal cord nodules

https://www.ijhas.in/article.asp?issn=2278-344X;year=2019;volume=8;issue=4;spage=282;epage=284;aulast=Khoja

5) Response to Ayurvedic therapy in the treatment of migraine without aura

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/20532095/

6) Ayurvedic evaluation and treatment of Covid 19: A case report

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0975947621001364


अस्वीकरण (DISCLAIMER):

इस लेख में जानकारी आपके ज्ञान के लिए दी गयी है| किसी भी उपाय/नुस्खे/दवा आदि को इस्तेमाल करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर कर लें, क्योंकि वो आपके स्वास्थ्य के बारे में ज्यादा जानता है| हमारे किसी उपाय/नुस्खे/दवा आदि के इस्तेमाल से यदि किसी को कोई नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी|


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